किस ओर तुम हो

किस ओर तुम होइस तरफ मैं हूँशशांकितभावनाओं के समुन्द्र में।खुद से अलग होकरमैं किस ओर हूँउस तरफ तुम होद्रवित,साथ साथ चलनाथक जानामालूम है अंतभावनाओं का कुचल जानाअपनी अपनी दुनिया मेंलड़नाआराम करनाथकावट का मिट जाना,इस ओर तुम्हारा आनामेरा उस ओर जानानियत हैतुम्हारा खुद से बिखर जानामेरा खुद से बिखर जानाफिर से साथ आनाफिर बिछड़ जाना।विरक्ति की …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि