जड़ पुरुष

मेरे अंदर एक पुरुष छुपा बैठा हैकभी कभी वो बाहर आ जाता हैमुझे उस पुरुष से डर लगता हैक्योंकि मेरे प्रेमिका उससे डरती है। मेरी प्रेमिका के अंदर भी एक पुरुष छुपा हैकभी कभी वो बाहर आ जाता हैमेरी प्रेमिका को पता नहीं चलता हैकि इस पुरुष से भी उसे डरना है। मैं मुक्त नही …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि