गाँव से शहर शहर से गाँव

भूख से तड़प कर अपने पहचान से डरकर गाँव छोड़ गए तुम अपनी पहचान छोड़ गए तुम सत्ता से पूछा नहीं तब कोई सवाल तुम्हारे गाँव छोडने से नही मचा था कोई बवाल । मुंबई, लुधियाना, सूरत दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद तुम्हारे खून से कई शहर हुये आबाद , अब जब विपदा की पड़ी मार गाँव …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि