गाँव से शहर शहर से गाँव

भूख से तड़प कर अपने पहचान से डरकर गाँव छोड़ गए तुम अपनी पहचान छोड़ गए तुम सत्ता से पूछा नहीं तब कोई सवाल तुम्हारे गाँव छोडने से नही मचा था कोई बवाल । मुंबई, लुधियाना, सूरत दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद तुम्हारे खून से कई शहर हुये आबाद , अब जब विपदा की पड़ी मार गाँव …

लाल

बेड़ियाँ तोड़ कर फेकने की जरूरत  है आवाज अगर उठाई है किसी ने तो आवाज बढ़ाने की जरुरत  है साथ चलने का वादा करो तो कुछ देर नहीं मंजिल तक साथ चलो मंजिल मिलेगी मंजिल दिल में स्थापित करो फिर कोई चले न चले तुम चलते रहो। आग जली है तो गरीबी, भूख, दर्द, बेरोजगारी …

गोडसे तुम हारोगे

हारोगे ही गांधी के हत्यारे ! तुम्हे जीना ही होगा मुँह छुपाके, ये धरती सत्य की है, झूठ तुम ढँक  ही जाओगे। महात्मा की करुणा में, जब तुम निर्मल न हुए, प्यार और श्रद्धा में, जब तुम पावन न हुए, गोडसे तुम्हें  हारना ही होगा, चाहे जहाँ जिस में रहो।  मानवता मोहताज नहीं भीड़ की …

“पर सियासत इसपे डोरे डालता है”

रात इतनी खामोश है या इसमें भी कुछ स्वर हैगहरे सन्नाटों में भी क्या कोई हलचल हैतेज चलती सांसें भी कुछ कहने को आतुर हैझुकी पलकों का इशारा सब राज खोलती हैंहम भी नादाँ वो भी चुप हैं,हमारी आहें सब बोलती हैं . अपनी ख़ामोशी रातों के सन्नाटें इतनी जल्दी कैसे टूटेमासूम खिलखिलाहट वादियों में …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि