गाँव से शहर शहर से गाँव

भूख से तड़प कर अपने पहचान से डरकर गाँव छोड़ गए तुम अपनी पहचान छोड़ गए तुम सत्ता से पूछा नहीं तब कोई सवाल तुम्हारे गाँव छोडने से नही मचा था कोई बवाल । मुंबई, लुधियाना, सूरत दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद तुम्हारे खून से कई शहर हुये आबाद , अब जब विपदा की पड़ी मार गाँव …

मांग लो अब पूरी दुनिया

रोटी रोटी करकेगावँ छोड़ कर गए थेभूख से जल कर भीअपने हक के लिएतुम नहीं लड़े थेझूठे जाल में अमीरों केतुम फँस गए थेमेहनत तुम कर रहे थेपर अलसी षड्यंत्रकरी तुमको हीअलसी कह रहे थेतिजोरी उनकी भर गईखाली रह गया तेरा हिस्सा।थारी दुनिया तैयार खड़ी हैअब बिखर जाने कोसरकार भी खड़ी हैआग लगने कोजो जितना …

सत्ता

हमें नोंचने मर्जी थोंपने सब आयें हैं बारी बारी कोई हमारा हाल न जाने खुशहाली लाबे की सत्ता करें तैयारी कोई न पूछे क्या अच्छा है मेरे लिए ए सी कमरों ने तय कर दी है हमारी जिम्मेदारी, हमे चाहिए रोटी और तरकारी सत्ता कहे राम मंदिर है सब की भलाई हमे चाहिए रोजगार सत्ता …

अकेला पेड़

एक पिलपिलती हुई सड़क पे मैं चल रहा हूँ
महान हिंदुस्तान की गोद में
कीचड़ में सन कर
पर मैं आह्लादित हूँ अपने अतीत की जड़े खोदकर
और आज के यक्ष प्रश्नों को अनंत काल तक टाल कर
मैं अपने पैरों को कीचड़ में और अंदर तक धँसाना चाहता हूँ

”तुम सब लड़ो दोनों देशद्रोही सत्ता में रहेंगे”

अयोध्या में मन्दिर मेरे खून पे बनेगा अयोध्या में मस्जिद मेरे खून पे बनेगा एक तुम से तेरा खुदा मंगता  है एक तुम से तेरा राम-लल्ला मंगता है दोनों आपस में कभी ना लड़ेंगे तुम सब लड़ो दोनों देशद्रोही सत्ता में रहेंगे अगर रख नही सकते अपने दिल में राम को अगर रख नही सकते अपने …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि