धुकधुकी

नारी आज भी तुमको छूपना पड़ता है, हो निर्णय तुम्हारा कितना भी उचित सवालों से वार किया जाता है. अँधियारे मे गर तुम रोशनी बन चमक जाती हो, तुम्हारी चमक को बुझाकर फिर से जलाया जाता है. नारी आज भी तुम्हारी आजादी अपनी नहीं है, तुम से अधिक महत्व हिजाब को दिया जाता है. कुमकुम …

“गोपियाँ क्या करें “

गली गली हर चौराहे पर  बाल बचपन ज़िन्दगी के दोराहे पर  यहाँ हर कोई मुरलीवाला है  अब गोपियाँ  बेचारी क्या करें  किसके लिए सुध-बुध खोये  किसको स्वामी मान मान जीवन सुख भोगे  बड़ी व्यथा है बड़ी उलझन है  एक नहीं अब यहाँ सभी गिरिधर हैं  प्रश्न  उठता हो उनके भी मन में  बदला है दौर …

“चाहत सर्वस्य अर्पण की “

रव ने मुझे दी है जितनी सासें तुझे देता हूँ अपना आज भी और कल भी देता हूँ जो वक़्त गुजरे तेरे बिना,क्षमा मांगता हूँ रव ने मुझे दी है जितनी खुशियाँ तुझे देता हूँ तेरे गम को अपना मानता हूँ जो गम तुझे मिले क्षमा मांगता हूँ रव ने मुझे दी है जितनी सफलतातुझे देता हूँतेरी असफता अपना मानता हूँमिले सफलता तुझे …

नीली वाली मेरी वाली

जब से तुम्हें देखा है तुम मेरे लिए नीली वाली हो हाँ उस दिन तेरे टॉप का रंग यही था जब तूम अपनी सहेली के साथ जा रही थी वो मेरे दोस्त की पीली वाली हम दोनों ने तब से तुम्हें बाट लिया है अब तुम मेरी वाली हो उस दिन हम दोनों ने पार्टी किया …

“भारत महान “

आओ हम सब जयकार करें खाने को रोटी नहींबदन पे कपड़ा नहींभारत को महान कहें।आधी आबादी वोट नहीं करतीवोट देना बेकार समझती25% वोट से कम में हम जीतेंसबसे बड़े लोकतंत्र को सलाम कहें।रोज हो रहें हैं दंगेमंदिर-मस्जिद बनाएंअंतर में नफरत से उबलते रहेंआपसी एकता की गुणगान करें।धर्म का बाज़ार लगायें अल्लाह-राम नीलाम करें कुरान-वेद की देश में सभ्यता-संस्कृति की …

मुस्कुराहट का आंचल

सुंदर तन सुन्दर मन और तो और ओढ़ ली हो जैसे मुस्कुराहट का आंचल लगती हो कोई परी आखें खुली हो या बंदमिलती रहती हो  हर कहीं ऐसा लगता है तुम हो हकीकत चाहता हु जब स्पर्श तेरा बदल लेती हो अपना बसेरा  तुम क्या हो समझ नही पता हूँ  हो हकीकत या कोई परी रास्ते तो बहुत है  तेरे पास पहुचने का तेरे पास पहुँचता हूँ वैसे जैसे सीसे के …

“अन्जान मोहब्बत “

ये प्यार की लहरें यूँ ही न  बिखर जाएँ चट्टनों  से टकरा  कर सागर से पहले न  दम  तोड़ जाएँ अंजान  मोहब्बत और मै  अदना  सा  कातिल  उनकी निगाहें और मै  सहमा सा  कभी नजरें चुराता कभी खुद को छुपता  चला मै  अपने धुन  में  अंजान –अंजान मै सहमा सा  अपनी निगाहों से  चलता उसे  घेरे  कहीं जादू कोई चल  जाये , वो मरे प्यार में पड़ जाये    दिल में लिए अरमान  मै   प्यार में नादान  कैसे उसको रिझाऊं  कैसे उसको बेचैन कर जाऊं  अपनी निगाहें से वो मुझे हटने ना  दे ऐसे वो मुझे  अपनी निगाहों से घेरे  प्यार में बेचैन मै खुद  को  कहीं प्यार ना  कर पाऊं   खुद को कर बदनाम  मै   उसको कहीं खो ना जाऊं अंजान मोहब्बत   और मै …

दीदी

दो अछर की मेरी दीदी कहते हैं उसे लोली  नाक उसके बड़े-बड़े  आँखें उसकी गोल  कभी न पटती मुझसे  कभी न खेलती मेरे साथ खेल  उससे तीन वर्ष का छोटा हूँ   तीन वर्ष  बड़ा मानता हूँ अपने को हर वक़्त रोब जमता  कहने का हूँ मै छोटा  कभी न उसकी मै सुनता  जो मन …

“अलग -थलग “

मै  पड़ गया हूँ अलग थलग जागने सोने के चक्कर में  खोने पाने के क्रम में दुःख सुख के जाल में नाम अमर और बदनाम होने के भैय  से  मै पड़ गया हूँ अलग थलग अपनों के बिछड़ने के डर से बहार आने से पहले उजड़ने के डर से फूलों के मुरझाने से  कांटें चुभने …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि