हर्द कहाँ हो तुम

रोज-रोज मुझे जिलने वाली औषधियां
अपना असर खो जाने को है,दर्द कहाँ हो तुम।
अब मेरे इरादे डगमगाने को है
जीवन लहर बन दौड़ बन जानेवाली, कहाँ हो तुम

अजनबी मुलाकात

कोई कोई अजनबी मुलाकात हो जायेकोई लम्हा आकर मुझसे कहेतुम्हे देखु मन मचले दिल वही ठहर जायेतुम्हारे पैरों की थापथपहत मेरी धड़कनो को आवाज देकोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये। कोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये।मेरे अंदर जो आग है वो दफ़न  न होतुम्हारे अंदर की शीतलता  बनी रहेमुझे तपिस मिले तुम्हे नमीं मिलेकोई ऐसी …

मुझे भी जिंदा होने का मन करता है

मेरे मुल्क की आधी आबादी तुम जिंदा हो इस बात का जिरह नहीं करना मुझको की तुम कहाँ हो तुम सबरी माला में हो या शाहीन बाग में बस ये जान कर सुकून हुआ तुम जिंदा हो। और उस वक़्त में जब मुल्क को जागने की जरूरत है तुम मशाल लेकर निकल पड़ी हो अब …

अकेलापन

      घोर अकेलापन है साथी साथ में ज़ुल्मतों के दौर का होना और बीच बीच में मेरा तुम्हारा साथ छोड़ देना दुविधा जगाती हैं हर सुबह सूरज का उग जाना।     घोर अकेलापन हैं साथी साथ में तेरा रूठ जाना और मेरा तुम से लड़ जाना दुविधा जगाती हैं प्यार के मौसम …

सत्ता दंगा , दंगा सत्ता

मैं आज भी उतना ही सच हूँ जितना कल तक दुनियाँ मान नही पाती थीं हर सच्ची बातें जो दुनियाँ को मैं कहता हूं उतना ही झूठ मैं खुद से कहता हूं मैं नेता हूँ लो आज मैं झूठ हूँ उतना ही जितना कल तक सच था कल तक मैं गुजरात था आज मैं बिहार …

महबूब तू तो बदल

प्यार तो करता हूँ जैसा मैं चाहता हूँ जैसा तुम चाहती हो पर इस अँधेरे में जीना कैसा जहाँ सपने भी दिखाई न देते हों। कुछ दूर चालना बहुत देर रुक जाना मेरा दोहरापन थकने का नाम ना लेता है यूँ तो भरा हूँ बदलाव के छावँ से लेकिन बदलाव मुमकिन नहीं मान बैठा हूँ …

अजनबी मुलाकात

कोई कोई अजनबी मुलाकात हो जायेकोई लम्हा आकर मुझसे कहेतुम्हे देखु मन मचले दिल वही ठहर जायेतुम्हारे पैरों की थापथपहत मेरी धड़कनो को आवाज देकोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये। कोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये।मेरे अंदर जो आग है वो दफ़न  न होतुम्हारे अंदर की शीतलता  बनी रहेमुझे तपिस मिले तुम्हे नमीं मिलेकोई ऐसी …

उम्मीद

बार-बार ठुकराये जाने को मै चले आता हूँ तेरे पास प्रिये , तुम झिड़क देती हो ,चला जाता हूँ मै मुझे मेरा खो जाना है स्वीकार प्रिये. अपने आप को समर्पित कर जाने को मै अपना जीवन उपहार लिए आता हूँ मै दर्द पाने को बारम्बार प्रिये अपना कल मुझे खो जाना है स्वीकार प्रिये …

“ क्या लिखूं “

    क्या लिखूं? जीवन के हर हिस्से परलहु के हर कतरे परस्वप्नों के हरेक सांस परतेरा अधिकार लिखूंदर्द लिखूं या हर्ष लिखूंप्रिये लिखूं या जान लिखूंतू मुझ से इतर कहाँ हैमै तेरा हूँ तू मेरी है.    क्या लिखूं? उलझन लिखूं या समाधान लिखूंतड़प लिखूं या प्रशांत लिखूंमेरे हरेक गीत हर टूटी पंक्तियाँ तेरी हैतू मुझ से इतर कहाँमै …

कुछ तो असर होगा तेरा

अजनबी थे बेहतर सोचा करता था मगर इतना सुकून कहाँ था कुछ तो असर होगा तेरा तेरा होने का. कि स्थिर हुआ जाता है अब मन व्यथित जो घूमता था कल तककुछ तो असर होगा तेरा तेरा होने का. ख्वाब के पंख थे उड़ने की कोशिश में रहता था मगर ख्वाब में जान अब आई …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि