जड़ पुरुष

मेरे अंदर एक पुरुष छुपा बैठा हैकभी कभी वो बाहर आ जाता हैमुझे उस पुरुष से डर लगता हैक्योंकि मेरे प्रेमिका उससे डरती है। मेरी प्रेमिका के अंदर भी एक पुरुष छुपा हैकभी कभी वो बाहर आ जाता हैमेरी प्रेमिका को पता नहीं चलता हैकि इस पुरुष से भी उसे डरना है। मैं मुक्त नही …

“ड्स्ट्बीन के सहारे स्वर्ग”

तुम गरीब क्यों जिंदा हो,अमीर शर्मिंदा है तुम कुड़े भी चुरा लेते हो,अमीर शशांकित जीता है ये तुम्हें कुड़े देकर अहसान न जता पाते है तुम मे क्यों कुड़े चुराने का   हौसला है । अपनी तिजोरी को बचाने मोटे ताले बनाए है तुम्हारे जीने की जीविवसा से डर कर धर्म, पूर्व-जन्म के कर्म-फल के पहरे …

“हम सब चोर हैं” (ख़ुद क़े खिलाफ बगाबत य़ा सच )

अन्ना ने जब लोकपाल माँगा हम ने उन्हें खूब सराहा सभी लेकर निकल पड़े झंडे  हम भी अन्शन करेंगे,खायेंगे डंडे यूँ भी हम रोज मरते हैं  भूखे रह कर  अन्शन ही करते हैं दिल्ली जाकर अन्ना के अन्शन  को बल देंगे भारत को क्रप्शन मुक्त करेंगे लगा क्रप्शन को उखड कर ही दम लेंगे   न्याय-नीति की बात करने वाले मिड-डे-मील चुराने वाले अध्यापक …

नई ऊर्जा: An encouraging Poem

कोई हो  कसक या  उलझन 
उसे दुःख पे न थोपो तुम
हो कोई समस्या जीवन में
समाधान  तुम्हे ही बनना होगा
कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि