नई ऊर्जा: An encouraging Poem






कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा 
लाख दुखों को दोष दें 
दुःख संग ही जीना होगा.
 
कोई हो  कसक या  उलझन 
उसे दुःख पे न थोपो तुम
हो कोई समस्या जीवन में
समाधान  तुम्हे ही बनना होगा
कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.
 
अगर है तन्हाई जीवन  में
दुनिया को नीरस  न बताओ  तुम 
दुनिया तो है चंचल 
चलती रहती अपने धुन में
तुम्हे अपने धुन में चलना होगा
मंजिल तक रमना होगा

कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.

 
पिपासा भरी पड़ी है तेरे अन्दर
वो तुम्हे खोने का ही अहसास कराती है 
खोया तमने कुछ  होगा,वो उसे बड़ा बताती है
पाया है तुमने जो बहुत कुछ
उसका ध्यान आप ही करना होगा
दुःख से हटकर खुद को  सुख से भरना होगा

कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.

सपने अधूरे हैं अगर तुम्हारे
स्वपर्निल संसार को दोष न दो
भ्रमित किया है इसने तुमको
कह कर,खुद को दोष मुक्त न करो
अगर  किया है गलती कुछ तुमने
साहस के साथ स्वीकार करना होगा
खुद को अच्छाई से भरना होगा
कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.

दुःख में वो दम कहाँ
जो तुम्हे तोड़ दे
दुःख तो है कमजोर साथी
हमें उव्देलित कर अपनी कमजोरी छुपाती है
सुख तो है शर्मीला साथी,अपनी पहचान छुपाती है
उसे मजबूत बना,खुद को मजबूत करना होगा
कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.

सिर्फ यही नहीं दर्शन  जीवन के
इसे तो बस एक छाया मानकर चलना होगा
दुनिया   तो   दर्शन   से  भरी  पड़ी
इसकी हर छटां, बिखेरती एक दर्शन नई
तुम्हे हर दर्शन को समझकर चलना होगा
खुद तुमको,एक जीवन दर्शन बनना होगा
खुद को नई ऊर्जा से बहरना होगा

कण-कण से हम बने हैं
कण-कण में ही बटना होगा.
Note-Part of artwork is borrowed from the internet ,with due thanks to the owner of the photographs/art

“जीये तो वो हैं”

खुद को संयमित करके 
जो पहाड़ो को जितने का हौसला रखे  
धाराओं को चीर करके जो उस पार पहुंचे
जीये  वो हैं,
हम सिर्फ जिन्दा हैं.

रस्ते के काँटों को देख कर भी 
जो कभी न रुके
पथरीले राहों पर भी 
जो निरंतर बढ़ते रहे
जीये  वो हैं,
हम  सिर्फ जिन्दा हैं.

खुद के जख्मों को खुरेद्कर
जो औरों के जख्म भरे
खुद के आंसू पी कर
जो औरों के आंसू पोछने का मद्दा रखे 
जीये  वो हैं,
 हम  सिर्फ जिन्दा हैं

वक़्त चाहे कितना भी कठिन हुआ हो
खुद को सदा,अपने सपने से जोड़कर रखे
जब औरों को उनकी जरूरत पड़ी
खुद के सपने तोड़ने से जो पीछे न हटे
जीये  वो है,
हम  सिर्फ जिन्दा हैं.

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“रंग भर दो “

सादा है तन मेरा
रंग भर दो
अकेले हूँ पथ पर 
संग चल दो
जीवन है नीरस  मेरा
रंग भर दो
खो गए साथी मेरे 
साथ हो जाओ तुम
मेरे जीवन में उमंग भर दो
सादी है जिन्दगी मेरी 
रंग भर दो
धीरे-धीरे चलकर 
थक गया हूँ मै 
मेरे संग तेज चलकर 
मुझमे लगन भर दो
सादी है जिन्दगी मेरी
रंग भर दो
खो गए है सपने सारे
बदरंग  हो गए सपने हमारे
मेरे सपनो के संग चल दो
 मेरे सपनो में रंग भर दो
सादी है जिन्दगी मेरी 
रंग भर दो.

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“एक खेल “

हर किशोर ने एक खेला होगा

विरह वेदना और संताप को झेला होगा
कुछ टूट कर बिखर गए होंगे
कुछ ने टुकरो में खुद को समेटा होगा .
हर किशोर ने खेला होगा
प्यार के पत्थर को उछालकर 
एक दुसरे पर फेका होगा 
हँसी और उल्लास को बटा होगा 
एक दुसरे पे मरने को आतुर 
हर किशोर हुआ होगा.
हर किसी को हमउम्र  की तलाश होती है
पर एक किशोर जब एक किशोर से जुड़ा होगा
सामाजिक बंधन उसे क्यों जकड़ा 
क्या बुराई है, हमारे रिश्ते में
क्यों उठाई उँगलियाँ लोगो ने
ये सवाल हर किशोर मन झकझोरा होगा.
हर किशोर ने झेला होगा
बेमतलब रोक-टोक की गलानी को
उसकी बुद्धि   कहे जो ठीक है ,उसे
गलत किसी ने बोला होगा
बालको ने कम, बालिकाओं ने ये दंस ज्यादा झेला होगा
रोकर खुद को जलती क्यों हो
विद्रोह करने का उनका  मन भी बोला होगा
कुछ ने खुद को दबाये  रखा 
कुछ ने तसलीमा बनकर मुंह खोला होगा
बदले में मौत का फतवा/ मौत पाया होगा
किसी को भाई ने गला दबाया
किसी को पिता या पति ने बेरहमी से मारा  होगा.
हर किशोर ने एक खेला होगा 
परम्परा से हटकर कुछ करने को सोचा होगा
होकर उदास कभी,
गुस्से से भरकर
दुनियां जलने को सोचा होगा
हर किशोर ने एक खेल खेला होगा
जीवन को दाव पे लगा 
सपनों  में उलझा होगा
कुछ सपनों के जाल  को तोड़
मंजिल तक पहुंचा होगा 
कुछ इस जाल  में उम्र भर उलझा होगा
हर किशोर अपनी शक्ति की आग में झुलसा होगा
कुछ ने अपनी शक्ति को सच में परखा होगा 
कुछने   व्यर्थ  के कामों में 
अपनी शक्ति को खोया होगा 
कुछ ने अपनी शक्ति को 
अपने सपनों से  जोड़ा होगा.
हर एक किशोर ने खेला होगा 
 खुद में कभी उलझा होगा 
खुद में कहीं खोया होगा 
दुसरे को पाया बहुत थोडा होगा 
कुछ्ने सचमुच में ,खुद को बड़ा बना पाया होगा 
हर किशोर ने देखा होगा 
खुद को असमान में 
कुछ असमान तक सचमुच पहुंचा होगा 
कुछ के दिल को ठेस पहुंचा होगा 
कोई नहीं समझता हमें ,पाया होगा 
अपनी भावनाओं  को समझाने  को आतुर 
एक किशोर को ढूंढा होगा 
किशोर को, किशोर ही,
 समझ सकता है और कोई नहीं
हर किसी ने अपने उम्र में ,
ये दंस झेला होगा.
हर किशोर ने दुनियां को समझने का खेल खेला होगा
पर दुनियां कब समझी समझाने से 
कुछ  खुद  पर अड़े रहे होंगे 
कुछ ने दुनियां के साथ 
मजबूर होकर जीना सीख लिया होगा.
  हर किशोर ने एक खेला होगा
विरह वेदना और संताप को झेला होगा
कुछ टूट कर बिखर गए होंगे
कुछ ने टुकरो में खुद को समेटा होगा .

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“मुझको अमर कर दो “

अपने होंठो से कब तक लेता रहूँ नाम

ऑंखें मुंद कर कब तक तुझे देखता रहूँ प्राण 
कभी इन खुले आँखों को भी दर्शन दो
लेकर मेरा नाम  मुझको अमर कर दो.

 मेरी आत्मा को तृप्त होने दो 
मुझको अपने दिल में बसा  लो 
मुझ में और खुद में भेद मिटा दो 
लेकर मेरा नाम मुझको अमर कर दो.

तेरी रेशमी बिखरे बालों को,
मै सुलझाना चाहता हूँ
तेरे मोती जैसे मोटे आसूं 
मै पीकर प्यास मिटाना चाहता हूँ
मेरे समर्पण को स्वीकार 
तुम भी समर्पण कर दो
लेकर मेरा नाम मुझको अमर कर दो.

कितना प्यार है तुम से मुझको 
कैसे दर्शाऊं तुम्ही कहो
जैसे तुम्हे विस्वास हो वही कर दिखलाऊं
थोड़े से मेरे सपने हकीकत कर दो
लेकर मेरा नाम मुझको अमर का दो.

जिन्दगी क्या है? सिखा दो
विस्वास क्या है? बता दो
शमाँ  की तरह जलकर ,मुझको भी
जलने का वैभव दो
लेकर मेरा नाम मुझको अमर कर दो.

शमाँ  अकेले भी जल सकती है 
पर परवाने क्या जल सकते है? शमाँ बगैर 
हो कोई तरकीब तो, हमें दो
लेकर मेरा नाम मुझको अमर कर दो.

तू भी अधूरी मै भी अधुरा 
एक दुसरे से ही हम है पूरा
तेर मेरे बैगर रह जायेगा प्रेम पथ सुना
लेकर मेरा नाम दिल से 
प्रेमपथ अमर कर दो
लेकर मेरा नाम मुझको अमर कर दो.
     
                          विक्रम प्रशांत 


नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि