मेरी नायिका ने खुद को मेरी कल्पना बताया 
जो मै कहता हूँ उसे, खुद को उससे अलग बताया  
कहती है वो, तुम अपनी कल्पनाओ में खोये रहो 
मुझे मेरी अपनी जिन्दगी जीने दो 
मै जैसी हूँ स्वछंद नहीं 
जीती तो मै  हूँ ,जीवन नहीं .

तुमने कल्पनाओं मे जो बुना है
उसे हकीकत मत समझना 
अपनी कल्पनाओं में चाहो जितने गुण से सवारों 
मै  हर बार तेरे लिए सवर जाऊँगी 
तेरे संग चलने की  चाहत है 
पर हकीकत के मंच पर मै  खरी न रह पाऊँगी .

तेरी कल्पनाओं में ही मै  पूरी हो पाऊँगी 
हकीकत  में मै  हूँ उलझी 
बहुत सारे बन्धनों से जकड़ी 
 समाज के साथ नहीं करना प्रतिवाद 
तुम अपनी कल्पनाओ चाहे आजाद कर लो 
मै  ढलती रात हूँ,सुबह नहीं.

यूँ तो स्वच्छ निर्मल ,जीवन जीना है 
किसे प्यारा होता ये बंधन 
मै  तेरी कल्पनों में ही ये बंधन तोडूंगी 
तेरे संग चलूंगी तेरे संग झुमुंगी 
हकीकत में कितने बेड़ियों से जकड़ी .

तू कल्पनाओं में जी ले अपना जीवन 
मै हकीकत के दुःख झेलूंगी 
बहूँ बेटी बनकर यूँ ही घुटकर मर जाउंगी 
समाज की झूठी सान  बन जाउंगी
तू कल्पनाओं में चाहे ले चल कहीं 
तेरे संग खों जाउंगी . 

अगर करना हो मुझे स्वीकार 
हम सब  जी रहे काल्पनिक जीवन 
वास्तविक जिन्दगी कहीं और है
वास्तविक जिन्दगी प्यार से भरी है 
हर ओर अठखेलियाँ है ,किलकारियाँ है 
वहाँ न कोई बंधन ,न कोई बेड़ियाँ हैं 
सभी स्वछंद हैं ,सभी निर्मल हैं 

हमने ही ये काल्पनिक दुनियां हैं बसाई 
कल्पनाओं में जीने की हमने ये आदत डालीं 
ये कल्पना कब हकीकत बन गयी ,पता नही 
मेरी नायिका कब इससे जकड गयी ,पता नहीं 
ये बंधन वो ढोना चाहती 
उसे वो तोड़ना  नहीं चाहती .

हे समाज के बिधाता ,मेरी अर्जी सुनों 
बंद करो अपना ये स्वांग 
मेरी नायिका को मुक्त करो 
बन जाने दो उसे आईने सा निर्मल 
बन जाने दो उसे किसी के लिए किरण 
बन जाने दो उसे किसी के लिए फिर से घड़ी 
तोड़  दो अब उसके हकीकत का भ्रम 
जी लेने दो उसे वास्तविक जीवन .

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