जड़ पुरुष

मेरे अंदर एक पुरुष छुपा बैठा है
कभी कभी वो बाहर आ जाता है
मुझे उस पुरुष से डर लगता है
क्योंकि मेरे प्रेमिका उससे डरती है।

मेरी प्रेमिका के अंदर भी एक पुरुष छुपा है
कभी कभी वो बाहर आ जाता है
मेरी प्रेमिका को पता नहीं चलता है
कि इस पुरुष से भी उसे डरना है।

मैं मुक्त नही हूँ
न ही मुक्त है मेरी प्रेमिका
अंदर छुपे दंभी पुरुष से
मुक्त करने को स्त्री चाहिए
एक स्त्री जो मुक्त हो अपने पुरुसत्व से
एक पुरुष जो मुक्त हो अपने पुरूष होने के दंभ से।

All art credit goes to My Friend Monika Kumari

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