“एक खेल “

हर किशोर ने एक खेला होगा विरह वेदना और संताप को झेला होगा कुछ टूट कर बिखर गए होंगे कुछ ने टुकरो में खुद को समेटा होगा . हर किशोर ने खेला होगा प्यार के पत्थर को उछालकर  एक दुसरे पर फेका होगा  हँसी और उल्लास को बटा होगा  एक दुसरे पे मरने को आतुर  हर …

“मुझको अमर कर दो “

अपने होंठो से कब तक लेता रहूँ नाम ऑंखें मुंद कर कब तक तुझे देखता रहूँ प्राण  कभी इन खुले आँखों को भी दर्शन दो लेकर मेरा नाम  मुझको अमर कर दो.  मेरी आत्मा को तृप्त होने दो  मुझको अपने दिल में बसा  लो  मुझ में और खुद में भेद मिटा दो  लेकर मेरा नाम …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि