हर्द कहाँ हो तुम

रोज-रोज मुझे जिलने वाली औषधियां
अपना असर खो जाने को है,दर्द कहाँ हो तुम।
अब मेरे इरादे डगमगाने को है
जीवन लहर बन दौड़ बन जानेवाली, कहाँ हो तुम

गाँव से शहर शहर से गाँव

भूख से तड़प कर अपने पहचान से डरकर गाँव छोड़ गए तुम अपनी पहचान छोड़ गए तुम सत्ता से पूछा नहीं तब कोई सवाल तुम्हारे गाँव छोडने से नही मचा था कोई बवाल । मुंबई, लुधियाना, सूरत दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद तुम्हारे खून से कई शहर हुये आबाद , अब जब विपदा की पड़ी मार गाँव …

मांग लो अब पूरी दुनिया

रोटी रोटी करकेगावँ छोड़ कर गए थेभूख से जल कर भीअपने हक के लिएतुम नहीं लड़े थेझूठे जाल में अमीरों केतुम फँस गए थेमेहनत तुम कर रहे थेपर अलसी षड्यंत्रकरी तुमको हीअलसी कह रहे थेतिजोरी उनकी भर गईखाली रह गया तेरा हिस्सा।थारी दुनिया तैयार खड़ी हैअब बिखर जाने कोसरकार भी खड़ी हैआग लगने कोजो जितना …

अजनबी मुलाकात

कोई कोई अजनबी मुलाकात हो जायेकोई लम्हा आकर मुझसे कहेतुम्हे देखु मन मचले दिल वही ठहर जायेतुम्हारे पैरों की थापथपहत मेरी धड़कनो को आवाज देकोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये। कोई ऐसी अजनबी मुलाकात हो जाये।मेरे अंदर जो आग है वो दफ़न  न होतुम्हारे अंदर की शीतलता  बनी रहेमुझे तपिस मिले तुम्हे नमीं मिलेकोई ऐसी …

मुझे भी जिंदा होने का मन करता है

मेरे मुल्क की आधी आबादी तुम जिंदा हो इस बात का जिरह नहीं करना मुझको की तुम कहाँ हो तुम सबरी माला में हो या शाहीन बाग में बस ये जान कर सुकून हुआ तुम जिंदा हो। और उस वक़्त में जब मुल्क को जागने की जरूरत है तुम मशाल लेकर निकल पड़ी हो अब …

सत्ता

हमें नोंचने मर्जी थोंपने सब आयें हैं बारी बारी कोई हमारा हाल न जाने खुशहाली लाबे की सत्ता करें तैयारी कोई न पूछे क्या अच्छा है मेरे लिए ए सी कमरों ने तय कर दी है हमारी जिम्मेदारी, हमे चाहिए रोटी और तरकारी सत्ता कहे राम मंदिर है सब की भलाई हमे चाहिए रोजगार सत्ता …

अकेला पेड़

एक पिलपिलती हुई सड़क पे मैं चल रहा हूँ
महान हिंदुस्तान की गोद में
कीचड़ में सन कर
पर मैं आह्लादित हूँ अपने अतीत की जड़े खोदकर
और आज के यक्ष प्रश्नों को अनंत काल तक टाल कर
मैं अपने पैरों को कीचड़ में और अंदर तक धँसाना चाहता हूँ

अकेलापन

      घोर अकेलापन है साथी साथ में ज़ुल्मतों के दौर का होना और बीच बीच में मेरा तुम्हारा साथ छोड़ देना दुविधा जगाती हैं हर सुबह सूरज का उग जाना।     घोर अकेलापन हैं साथी साथ में तेरा रूठ जाना और मेरा तुम से लड़ जाना दुविधा जगाती हैं प्यार के मौसम …

सत्ता दंगा , दंगा सत्ता

मैं आज भी उतना ही सच हूँ जितना कल तक दुनियाँ मान नही पाती थीं हर सच्ची बातें जो दुनियाँ को मैं कहता हूं उतना ही झूठ मैं खुद से कहता हूं मैं नेता हूँ लो आज मैं झूठ हूँ उतना ही जितना कल तक सच था कल तक मैं गुजरात था आज मैं बिहार …

नागार्जुन: हिन्दी और मैथिली साहित्य का अप्रतिम कवि