Abhi tum radha bankar sath rho na

हर तरफ है तन्हाई
अभी उड़ रहें हैं प्राण
घर बन रहें हैं कंक्रीट के मकान
दुःख का मौसम है
छाया है मातम इस जहाँ में
अभी तुम सिर्फ अहसास बन कर साथ रहो न
अभी तुम राधा बन कर साथ रहो न।
गुजर जाने दो स्याह भरी रात
हो जाने दो सुबह गुलजार
घुल जाने दो खुशी हर मन में

उदास मौसम के कांटे को गुलाब बन कर खिल जाने दो,
तब तलक तुम सिर्फ अहसास बन कर साथ रहो
अभी तुम ख्वाब बन कर साथ रहो न।
खो गए स्वाद जहाँ से
गायब हो गए है गन्ध सारे
आ जाने दो भीनी भीनी खुशबू वापस
तब तलक तुम अहसास बनकर साथ रहो न
अभी तुम राधा बनकर साथ रहो न।

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