कह रहे हो कोई कहानी
तुम जोश में
मत खोलो कई गुत्थियां
जान कोई अटकी हो
न जाने उसकी आगोश में
कि हाथ तुम्हारे पकड़ कर
वो चल दी थी संग कहीं
की थी कई अठखेलियां, नादानियाँ, मस्तियाँ
नाम कुछ दिए बिना
राज खोलें हो उसने
अल्हड़पन के आवेश में कई
न जाने वो किस शहर की थी
जी रही थी कहीं दुबकी दुबकी
तुम्हारे हाथ पकड़ कर
कर रही थी पागलपन
चल रही थी कहीं भी
तुमने सिगरेट सुलगाया था
कई कश उसने मारा था
धुंआ अटक अटक रहा था
से दूर निकल कर
हर कश में कितने रिंग बनाया था
शराब की हर घुट भी
कर रही थी कहानी बयां
पीछे छोड़कर न जाने कैसी जिंदगी।
तुम चाहे हो शब्दों के जादूगर
उलझते हो जिंदगी
पर जो कहानी तुम कह रहे
वो है सांस लेती जिंदगी
मत कहो उस वक़्त
वो तुम्हारे प्रेम में थी
इस पल तुम उसके प्रेम में हो
नाम कुछ नहीं दिया जब उसने
तुम्हारा उसके इस पल पर हक नहीं
कह रहे हो कोई कहानी
तुम जोश में
मत खोलो कई गुत्थियां
जान कोई अटकी हो
न जानें उसकी आगोश में।

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