रोशनी में प्रेम

दिन की कहानी है हमारी
रोशनी में हैं हम मिले
बात बस इतनी सी है
प्रेम में हैं हम दोनों।

हर रोज टूटता क्यों है
पास न आने का वादा
एक दूसरे में खो न जाने का इरादा
पता नही है हमको
बात बस इतनी हैं
प्रेम में हैं हम दोनों।

प्रेम हमारा
कितना सच है
कितना  गहरा है
पता नहीं हैं हमको
बात बस इतनी है
कोई बंधन नहीं हैं।

रोशनी में प्रेम

भाग 2

धूल, धुंआ ,धुंध
पत्थर, पत्ती फूल
सभी से प्यार हो जाएगा
तुम सच हो प्यार
खुशी की तरह
और बिखरे हो खुशबू की तरह।

मेरे अंदर उमीद जागते हो
कि रोज सुबह सूरज निकलेगा
और चांदनी रात होगी जीवन में।

हम-तुम डूबे होंगे एक-दूसरे में
लेकिन साथ होंगे सभी
जैसे तुम से जुड़कर संपूर्णता को प्राप्त हो जाऊंगा
और नहीं भेद कर पाऊंगा किसी से।

रोशनी में प्रेम

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